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Saturday, April 28, 2012

मीडिया को पूंजीवादी ताक़तों का एजेंट नहीं बनना चाहिए --अतुल अनजान



शेष नारायण सिंह 

नई दिल्ली,२८ अप्रैल.अपना एकछत्र राज कायम करने के लिए साम्राज्यवादी ताक़तें हर सीमा पार कर रही हैं . संसदीय लोकतंत्र की सीमाएं पार की जा रही हैं और संसदीय लोकशाही की संस्थाओं को बदनाम किया जा रहा है . पूंजीवाद की एजेंट ताक़तों की कोशिश है कि संसदीय लोकतंत्र की हर सम्माननीय संस्था को बदनाम किया जाए और लोकतंत्र को दफ़न करके ऐसी सत्ता व्यवस्था कायम की जाए जिस से साम्राज्यवादी विस्तारवादी शक्तियों को देश की सत्ता को तैनात करने में आसानी हो क्योंकि वही सत्ता तो इन ताकतों की चाकर सत्ता के रूप में काम कर सकेगी . दुर्भाग्य की बात यह है कि इस सारे काम में मीडिया की भूमिका पूंजीवादी ताक़तों के मुनीम की हो गयी है . अगर इस पर अवाम की तरफ से फ़ौरन रोक न लगाई गयी  तो देश के लोकतंत्र के सामने अस्तित्व का संकट पैदा हो जाएगा  भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सेक्रेटरी अतुल कुमार अंजान ने आज यह बातें समाजवादी नेता स्व.गौरीशंकर राय की याद में आयोजित एक समारोह में कहीं . 

गौरी शंकर राय स्मृति समिति वालों की ओर से आज यहाँ आयोजित एक समारोह में पिछली  सदी के राजनीतिक इतिहास पर ज़ोरदार चर्चा हुई. गौरी शंकर राय की याद में उनके पुराने साथी और समाजवादी विचारक सगीर अहमद ने  स्वर्गीय राय के समर्थकों को इकठ्ठा किया था. बहुत बड़ी संख्या में लोग आये. आज़ाद हिंद फौज के कप्तान अब्बास अली आये तो जवाहर लाल नेहरू   विश्वविद्यालय के  आनंद कुमार आये. समाजवादी पार्टी के रेवती रमण सिंह आये तो किसी छोटे राज्य के एक राज्यपाल भी अपने फौजी सहायक के साथ मौजूद थे. कांग्रेस के हरिकेश बहादुर भी थे और जे डी ( यू ) के महामंत्री के सी त्यागी भी . बहर हाल भारी भीड़ के बीच लगभग  दिन भर चले कार्यक्रम में गौरी शंकर राय के करीब ५० साल के राजनीतिक जीवन के बहाने राजनीतिक मूल्यों पर चर्चा हुई और समाजवादी  लेखक मस्त राम कपूर  और कम्युनिस्ट नेता अतुल कुमार अनजान ने राजनीति के बुनियादी सवालों पर बात शुरू कर दी. ज़्यादातर नेता तो स्वर्गीय गौरी शंकर राय के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते  रहे लेकिन अतुल अनजान की  शुरुआत के बाद बहस राजनीति और मीडिया की भूमिका पर केंदित हो गयी. अतुल अनजान ने कहा कि  आज पूंजीवादी ताक़तों के एजेंट खूब सक्रिय हैं . मीडिया संगठनों पर उन्होंने लगभग पूरी तरह  से क़ब्ज़ा कर लिया है . कुछ गिने चुने अखबार बचे  हैं जो अभी भी आम आदमी के सवालों को उठा रहे हैं .योजनाबद्ध तरीके से प्रचार किया जा रहा है  कि समाजवाद का अब कोई मतलब नहीं रह गया है .मार्क्सवादी राजनीति अब  बेमतलब हो गयी है . दुर्भाग्य यह है कि पूंजीवादियों के कंट्रोल में चल रहे मीडिया घरानों में काम करने वाले लोग अपनी समझ को मालिक की मर्ज़ी के  हिसाब से ढाल कर काम कर रहे हैं . और किसी सेठ  के मुनीम की तरह काम कर रहे हैं , अजीब बात है कि  मोटी तनखाहें उठा रहे पत्रकार  टी आर पी की बात कर रहे हैं और कारोबार बढाने की बात करके उसे ही नई पत्रकारिता का व्याकरण बता रहे हैं . राजनीतिक बिरादरी के लोगों को  चोर और बेईमान के रूप में पेश करके राजनीति की परम्परा को बदलने की सजिश भी साथ साथ चल  रही है . भ्रष्ट राजनेता के हवाले  से पूरी राजनीतिक जमात को नाकारा साबित करने  की कोशिशभी इसी साज़िश का हिस्सा है .  
स्वर्गीय गौरी शंकर राय ने पूंजीवादी साम्राज्यवादी  राजनीतिक शक्तियों को बेनकाब करने के लिए आजीवन काम किया . अतुल अनजान ने कहा उनको याद करके आज यह संकल्प लिया जाना चाहिए कि हर तरफ जनवादी ताक़तों को कमज़ोर करने की जो कोशिश चल रही है उसे नाकाम किया जाए .