शेष नारायण सिंह
राडिया की कृपा से २ जी स्पेक्ट्रम के इंद्रधनुष में रोज़ ही नए रंग हावी होने लगे हैं . राडिया के ताज़ा शिकार पूर्व उड्डयन मंत्री ,अनंत कुमार बन गए हैं .यह अलग बात है कि राडिया जी के मूल मित्र वही हैं लेकिन उनके कारनामों के बारे में जानकारी बाद में पब्लिक के सामने आई. खैर अब तो सारा मामला खुल चुका है . जब राडिया के एक पूर्व मित्र का दावा सार्वजनिक हुआ कि अनंत कुमार जी ने राडिया देवी को मंत्रिमंडल के गुप्त दस्तावेज़ भी थमा दिए थे, तो बीजेपी में उनके मित्रों की हालात देखने लायक थी. बेचारों ने घबडाहट में ऐसे बयान दे दिए जो अनंत कुमार पर लगे आरोपों को पुष्ट करते थे. मसलन , अनंत जी के मित्र और बीजेपी के एक आला नेता ने कहा कि अनंत कुमार ने राडिया को कोई ज़मीन नहीं अलाट की . हम भी जानते हैं कि पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री ,ज़मीन अलाट नहीं करता ,वह तो ज़मीन को अलाट करवाने में मदद करता है . उन नेता जी बताया कि गृहमंत्री लाल कृष्ण अडवाणी ने किसी ऐसे ट्रस्ट की बिल्डिंग का शिलान्यास नहीं किया जिसकी अध्यक्ष नीरा राडिया हैं . हाँ किसी स्वामी के किसी मठ का शिलान्यास करने वे ज़रूर गए थे . ठीक है. बहुत सारे संगठन ऐसे होते हैं जिसका मालिक उसका अध्यक्ष नहीं होता. उन नेता जी से जनता की अपील यह है कि बस इतना बता दें कि इन स्वामी जी से अनंत जी और राडिया जी के क्या सम्बन्ध हैं . कुल मिलाकर राडिया जी के सारे खेल के केंद्र में अब अनंत कुमार जी ही मौजूद पाए जा रहे हैं . २ जी स्पेक्ट्रम का पूरा केस राडिया के इर्द गिर्द ही बुना गया था . अब जब ए राजा और अनंत कुमार एक ही अखाड़े के पहलवान के रूप में पहचाने जाने लगे हैं तो जो हमला ए राजा पर होगा ,वह निश्चित रूप से अनंत कुमार को लपेटे में लेगा . कुल मिलाकर बीजेपी की उस कोशिश में ब्रेक लग गया है जिसके तहत वे यू पी ए को घेरने के चक्कर में थे .जो कुछ कसर बाकी रह गयी थी उसे संसद भवन के अन्दर एक प्रेस कानफरेंस करके डॉ मुरली मनोहर जोशी ने पूरी कर दी और जेपीसी की मांग की हवा निकाल दी. उन्होंने बीजेपी को जो सबसे बड़ी चोट दी ,वह थी एक लाख छिहत्तर हज़ार करोड़ रूपये के २ स्पेक्ट्रम घोटाले की हेडलाइन ही बदल दी. उन्होंने बाआवाज़ेबुलंद बताया कि यह घाटा एक लाख छिहत्तर हज़ार करोड़ रूपये का भी हो सकता है और सत्तावन हज़ार करोड़ रूपये का भी हो सकता है . उसकी जांच की जायेगी और जांच पी ए सी ही करेगी. दूसरी बात जो सबसे दिलचस्प है वह यह कि पी ए सी का काम केवल हिसाब किताब की जांच करना नहीं है ,डॉ जोशी ने बताया कि पी ए सी के पास पूरी टेलीकाम पालिसी की जांच करने का अधिकार है .उन्होंने साफ़ कहा कि अगर ज़रूरी हुआ तो एन डी ए के शासन काल के दौरान हुए काम की जांच भी की जा सकती है. ज़ाहिर है कि इस लपेट में अरुण शोरी और प्रमोद महाजन का काम भी आ जाएगा और जब राडिया वहां भी सक्रिय थीं, तो हेराफेरी ज़रूर हुई होगी.जेपीसी के पक्ष में जो तर्क दिए जा रहे थे उनमें एक यह भी था कि प्रधान मंत्री और मंत्रियों से पूछ ताछ करने का वही सबसे अच्छा फोरम है . डॉ जोशी ने साफ़ कह दिया कि प्रधान मंत्री ने तो चिट्ठी लिख कर पी ए सी के सामने हाज़िर होने का अपना प्रस्ताव भेज ही दिया है ,पी ए सी के अधिकार में है कि अगर वह चाहे तो मंत्रियों को भी तलब कर सकती है . डॉ जोशी की पत्रकार वार्ता में मौजूद कुछ पत्रकारों ने जब पूछा कि क्या वे प्रधान मंत्री को समन करने जा रहे हैं तो उन्होंने लगभग झिडकते हुए कहा कि समन करने का कोई मतलब ही नहीं है क्योंकि अब तो प्रधान मंत्री ने खुद ही हाज़िर होने की पेशकश कर दी है . यानी बीजेपी की वह इच्छा बी पूरी नहीं होने वाली है जिसमें वे प्रधान मंत्री को समन भेजकर तलब करने वाले थे. डॉ जोशी के बयानों से साफ़ है कि पी ए सी उन सभी बिन्दुओं की जांच कर सकती है जिनके लिए पी ए सी के गठन की बात की जा रही है . जानकार बताते हैं कि पी ए सी के पास जेपीसी से ज्यादा ताक़त है क्योंकि उसका अध्यक्ष विपक्ष का होता है जबकि जेपीसी का अध्यक्ष सत्ताधारी पार्टी का ही होगा.
बीजेपी के सिर राडिया के चक्कर में दूसरी मुसीबत भी आने वाली है .केंद्र में राज्यमंत्री वी नारायणसामी ने ने कहा कि " केंद्र सरकार इस बात की जांच करेगी कि क्या अनंत कुमार ने एन डी ए के शासनकाल के दौरान नागर उड्डयन मंत्री रहते हुए नीरा राडिया को किसी फैसले के बारे में जानकारी दी थी. अगर ऐसा किया है तो सरकारी जानकारियों को इस तरह सार्वजनिक कार्य राजद्रोह की श्रेणी में आता है."यानी अब मामला उलट कर बीजेपी के ही दरवाज़े पर पंहुच गया है और राडिया के चक्कर में फंस चुकी बीजेपी की कोशिश है कि किसी तरह इन राडिया जी से जान छूटे . इन कोशिशों को भारी झटका लगा है . जहां तक प्रोफ़ेसर मुरली मनोहर जोशी का सवाल है ,उनको वह दर्द नहीं भूला होगा जब आडवाणी गुट के लोगों ने डॉ जोशी को बीजेपी अध्यक्ष के रूप में चैन से नहीं बैठने दिया था. आज भी अगर बीजेपी को राजनीतिक फायदा होगा तो उसका लाभ दिल्ली में बैठे बीजेपी वालों को होगा जो आडवाणी गुट के बड़े नेता हैं . ज़ाहिर है जोशी जी भी इन लोगों के फायदे के लिए कोई भी गलत काम नहीं करेगें .वैसे भी वे आम तौर पर राजनीति लाभ के लिए उलटे सीधे काम नहीं करते.
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Tuesday, December 28, 2010
Thursday, November 18, 2010
भ्रष्टाचार का घेरा प्रधानमंत्री के मोहल्ले तक पंहुचा
शेष नारायण सिंह
डॉ मनमोहन सिंह को बीजेपी ने चारों तरफ से घेर लिया है .उन पर आरोप है कि उन्होंने २ जी स्पेक्ट्रम घोटाले को शुरू में ही न रोक कर गलती की . उससे देश का करीब पौने दो लाख करोड़ रूपये का नुकसान हुआ है .संसद के अंदर सरकार को घेरने में जुटी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से दस सवाल पूछकर सदन से बाहर भी उन्हें घेरने की शुरुआत कर दी है। गडकरी ने कहा है कि जब तक उन्हें इन सवालों के जवाब नहीं मिल जाते, वह संसद नहीं चलने देंगे। नितिन गडकरी के सवाल बहुत ही बुनियादी स्तर के हैं लेकिन सवाल तो हैं और मीडिया में चर्चित हो रहे हैं . २ जी स्पेक्ट्रम के घोटाले में सरकार की ज़िम्मेदारी बड़ी है और इसमें दो राय नहीं कि सरकार ने गलती की है .जो लोग गठबंधन सरकार की मजबूरी की बात कर रहे हैं , उनकी बात भी बिल्कुल गलत है. क्या किसी वैद ने बताया है कि कांग्रेस के नेतृत्व में सरकार चलती ही रहनी चाहिए .तथाकथित गठबंधन धर्म का यही मतलब तो बताया जा रहा है कि सरकार चलाते रहने के लिए ए राजा की कारगुजारियों को बर्दाश्त किया गया . किसने कहा था सरकार चलाने के लिए . इसी गठबंधन धर्म का सहारा लेकर बीजेपी ने भी केंद्र और उत्तरप्रदेश में भ्रष्टाचार के सारे रिकार्ड तोड़े थे. अब कांग्रेस ने उनका भी रिकार्ड तोड़ दिया है .२ जी घोटाला बहुत बड़ा है .इसमें डी एम के के आला नेता का परिवार पूरी तरह डूबा हुआ लगता है . उनके परिवार के एक कार्यकर्ता के रूप में दिल्ली में ए राजा तैनात थे . उन्होंने अपने चेन्नई वाले मालिकों के हुक्म से लूटपाट की और सारा माल मालिकों तक पंहुचाया . भ्रष्टाचार के किसी भी प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर पैसे का योगदान होता है . उसमें आर्थिक अपराध के मुक़दमे बनते हैं . यह देश का दुर्भाग्य है कि लगभग सभी राजनीतिक पार्टियां सत्ता में रहने के बाद लूटमार करती हैं . जब एक पार्टी लूटमार कर रही होती है तो विपक्षी पार्टियां दूसरी तरफ देखने लगती हैं . और जनता का पैसा बर्बाद होता रहता है . राजनीतिक बिरादरी के स्विस बैंकों के खाते भरते रहते हैं और अपने मुल्क की आबादी का एक बड़ा हिस्सा मुसीबतों का सामना करता रहता है. लेकिन जब किसी भ्रष्टाचार के मामले में राजनीतिक अवसर दिखता है तो विपक्षी पार्टियां टूट पड़ती हैं . ऐसा पहला बड़ा मौक़ा बोफर्स तोप घोटाला था . हालांकि उस घोटाले में राजीव गाँधी के शामिल होने के कोई साबूत नहीं थे लेकिन उनको एक भ्रष्ट आदमी के रूप में पेश करने में विपक्षी पार्टियां सफल हो गयीं. उनके कुछ करीबी लोग उस घोटाले में शामिल थे, उनको बचाने के चक्कर में राजीव गाँधी उलझते गए .जब १९८९ का चुनाव आया ,तो राजीव गाँधी बोफर्स के अभियुक्त के रूप में पेश किये गए और जनता की अदालत में उन्हें सज़ा सुना दी गयी. दूसरी बार विपक्ष ने सुखराम के टेलीकाम घोटाले में राजनीतिक अवसर देखा . करीब ३७ दिन तक बीजेपी ने लोकसभा का सत्र नहीं चलने दिया लेकिन सुखराम वाले केस में बीजेपी को वह फायदा नहीं हुआ जो १९८९ वाले बोफर्स केस में हुआ था. १९९६ के चुनाव में हालांकि कांग्रेस हार गयी लेकिन बीजेपी वहीं रह गयी जहां थी. शायद इसलिए कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी की राजनीतिक क्षमता का पता चल चुका था , वह एक भ्रष्ट पार्टी के रूप में पहचानी जाने लगी थी . बाद में जब सुखराम को बीजेपी ने अपनी पार्टी में भर्ती कर लिया तो सबको पता चल गया कि भ्रष्टाचार के पैमाने पर बीजेपी और कांग्रेस में कोई भेद नहीं है. २ जी स्पेक्ट्रम घोटाले में भी बीजेपी को वही बोफर्स वाला चांस दिख रहा है इसलिए सीधे प्रधानमंत्री को घेरे में लिया जा रहा है . २००४ में जब कांग्रेस ने डॉ मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया था तो बीजेपी के हाथ से सोनिया गाँधी पर हमला करने का एक बड़ा हथियार छिन गया था . पार्टी ने कोशिश की कि डॉ मनमोहन सिंह को एक कमज़ोर प्रधानमंत्री के रूप में पेश करके सोनिया गाँधी को घेरा जायेगा लेकिन मनमोहन सिंह बीजेपी के हर नेता से मज़बूत साबित हुए . लोकसभा में भी उन्होंने बार बार यह साबित किया कि वे बीजेपी के मीडिया पोषित नेताओं से बहुत बड़े हैं. हारकर बीजेपी ने स्वीकार किया कि डॉ मनमोहन सिंह बड़े नेता हैं और उनको भी हमले का निशाना बनाया जाना चाहिए . बीजेपी की मुश्किल यह है कि उसकी अपनी छवि एक निहायत ही भ्रष्ट राजनीतिक जमात की बन चुकी है और डॉ मनमोहन सिंह को पूरी दुनिया में एक ईमानदार राजनेता के रूप में जाना जाता है . ऐसी हालत में उन्हें भ्रष्ट साबित कर पाना कम से कम बीजेपी के लिए तो बहुत ही मुश्किल होगा . लेकिन राजनीति की अपनी शर्तें होती हैं . बीजेपी को अब मालूम है कि अगर मनमोहन सिंह को न घेरा गया तो बीजेपी का राजनीतिक भविष्य अंधकारमय हो जाएगा. २ जी के पहले कामनवेल्थ के घोटाले में बीजेपी ने राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की थी लेकिन उसमें तो बीजेपी वाले कांग्रेसियों से बड़े गुनाहगार के रूप में उभर रहे हैं. अब तक जिन दो बड़े ह्तेकों का खुलासा आया है ,उसमें बीजेपी के नेताओं या उनके रिश्तेदारों के नाम प्रमुखता से आये हैं . शायद इसीलिये अब बीजेपी ने २ जी वाला मामला पकड़ा है .उसमें उनकी पार्टी के लोग तो नहीं शामिल हैं लेकिन जो उद्योगपति फंस रहे हैं वे बीजेपी वाले ही हैं .न . जो भी हो आने वाला वक़्त राजनीतिक आचरण के हिसाब से बहुत ही दिलचस्प होने वाला है
डॉ मनमोहन सिंह को बीजेपी ने चारों तरफ से घेर लिया है .उन पर आरोप है कि उन्होंने २ जी स्पेक्ट्रम घोटाले को शुरू में ही न रोक कर गलती की . उससे देश का करीब पौने दो लाख करोड़ रूपये का नुकसान हुआ है .संसद के अंदर सरकार को घेरने में जुटी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से दस सवाल पूछकर सदन से बाहर भी उन्हें घेरने की शुरुआत कर दी है। गडकरी ने कहा है कि जब तक उन्हें इन सवालों के जवाब नहीं मिल जाते, वह संसद नहीं चलने देंगे। नितिन गडकरी के सवाल बहुत ही बुनियादी स्तर के हैं लेकिन सवाल तो हैं और मीडिया में चर्चित हो रहे हैं . २ जी स्पेक्ट्रम के घोटाले में सरकार की ज़िम्मेदारी बड़ी है और इसमें दो राय नहीं कि सरकार ने गलती की है .जो लोग गठबंधन सरकार की मजबूरी की बात कर रहे हैं , उनकी बात भी बिल्कुल गलत है. क्या किसी वैद ने बताया है कि कांग्रेस के नेतृत्व में सरकार चलती ही रहनी चाहिए .तथाकथित गठबंधन धर्म का यही मतलब तो बताया जा रहा है कि सरकार चलाते रहने के लिए ए राजा की कारगुजारियों को बर्दाश्त किया गया . किसने कहा था सरकार चलाने के लिए . इसी गठबंधन धर्म का सहारा लेकर बीजेपी ने भी केंद्र और उत्तरप्रदेश में भ्रष्टाचार के सारे रिकार्ड तोड़े थे. अब कांग्रेस ने उनका भी रिकार्ड तोड़ दिया है .२ जी घोटाला बहुत बड़ा है .इसमें डी एम के के आला नेता का परिवार पूरी तरह डूबा हुआ लगता है . उनके परिवार के एक कार्यकर्ता के रूप में दिल्ली में ए राजा तैनात थे . उन्होंने अपने चेन्नई वाले मालिकों के हुक्म से लूटपाट की और सारा माल मालिकों तक पंहुचाया . भ्रष्टाचार के किसी भी प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर पैसे का योगदान होता है . उसमें आर्थिक अपराध के मुक़दमे बनते हैं . यह देश का दुर्भाग्य है कि लगभग सभी राजनीतिक पार्टियां सत्ता में रहने के बाद लूटमार करती हैं . जब एक पार्टी लूटमार कर रही होती है तो विपक्षी पार्टियां दूसरी तरफ देखने लगती हैं . और जनता का पैसा बर्बाद होता रहता है . राजनीतिक बिरादरी के स्विस बैंकों के खाते भरते रहते हैं और अपने मुल्क की आबादी का एक बड़ा हिस्सा मुसीबतों का सामना करता रहता है. लेकिन जब किसी भ्रष्टाचार के मामले में राजनीतिक अवसर दिखता है तो विपक्षी पार्टियां टूट पड़ती हैं . ऐसा पहला बड़ा मौक़ा बोफर्स तोप घोटाला था . हालांकि उस घोटाले में राजीव गाँधी के शामिल होने के कोई साबूत नहीं थे लेकिन उनको एक भ्रष्ट आदमी के रूप में पेश करने में विपक्षी पार्टियां सफल हो गयीं. उनके कुछ करीबी लोग उस घोटाले में शामिल थे, उनको बचाने के चक्कर में राजीव गाँधी उलझते गए .जब १९८९ का चुनाव आया ,तो राजीव गाँधी बोफर्स के अभियुक्त के रूप में पेश किये गए और जनता की अदालत में उन्हें सज़ा सुना दी गयी. दूसरी बार विपक्ष ने सुखराम के टेलीकाम घोटाले में राजनीतिक अवसर देखा . करीब ३७ दिन तक बीजेपी ने लोकसभा का सत्र नहीं चलने दिया लेकिन सुखराम वाले केस में बीजेपी को वह फायदा नहीं हुआ जो १९८९ वाले बोफर्स केस में हुआ था. १९९६ के चुनाव में हालांकि कांग्रेस हार गयी लेकिन बीजेपी वहीं रह गयी जहां थी. शायद इसलिए कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी की राजनीतिक क्षमता का पता चल चुका था , वह एक भ्रष्ट पार्टी के रूप में पहचानी जाने लगी थी . बाद में जब सुखराम को बीजेपी ने अपनी पार्टी में भर्ती कर लिया तो सबको पता चल गया कि भ्रष्टाचार के पैमाने पर बीजेपी और कांग्रेस में कोई भेद नहीं है. २ जी स्पेक्ट्रम घोटाले में भी बीजेपी को वही बोफर्स वाला चांस दिख रहा है इसलिए सीधे प्रधानमंत्री को घेरे में लिया जा रहा है . २००४ में जब कांग्रेस ने डॉ मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया था तो बीजेपी के हाथ से सोनिया गाँधी पर हमला करने का एक बड़ा हथियार छिन गया था . पार्टी ने कोशिश की कि डॉ मनमोहन सिंह को एक कमज़ोर प्रधानमंत्री के रूप में पेश करके सोनिया गाँधी को घेरा जायेगा लेकिन मनमोहन सिंह बीजेपी के हर नेता से मज़बूत साबित हुए . लोकसभा में भी उन्होंने बार बार यह साबित किया कि वे बीजेपी के मीडिया पोषित नेताओं से बहुत बड़े हैं. हारकर बीजेपी ने स्वीकार किया कि डॉ मनमोहन सिंह बड़े नेता हैं और उनको भी हमले का निशाना बनाया जाना चाहिए . बीजेपी की मुश्किल यह है कि उसकी अपनी छवि एक निहायत ही भ्रष्ट राजनीतिक जमात की बन चुकी है और डॉ मनमोहन सिंह को पूरी दुनिया में एक ईमानदार राजनेता के रूप में जाना जाता है . ऐसी हालत में उन्हें भ्रष्ट साबित कर पाना कम से कम बीजेपी के लिए तो बहुत ही मुश्किल होगा . लेकिन राजनीति की अपनी शर्तें होती हैं . बीजेपी को अब मालूम है कि अगर मनमोहन सिंह को न घेरा गया तो बीजेपी का राजनीतिक भविष्य अंधकारमय हो जाएगा. २ जी के पहले कामनवेल्थ के घोटाले में बीजेपी ने राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की थी लेकिन उसमें तो बीजेपी वाले कांग्रेसियों से बड़े गुनाहगार के रूप में उभर रहे हैं. अब तक जिन दो बड़े ह्तेकों का खुलासा आया है ,उसमें बीजेपी के नेताओं या उनके रिश्तेदारों के नाम प्रमुखता से आये हैं . शायद इसीलिये अब बीजेपी ने २ जी वाला मामला पकड़ा है .उसमें उनकी पार्टी के लोग तो नहीं शामिल हैं लेकिन जो उद्योगपति फंस रहे हैं वे बीजेपी वाले ही हैं .न . जो भी हो आने वाला वक़्त राजनीतिक आचरण के हिसाब से बहुत ही दिलचस्प होने वाला है
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