Monday, July 26, 2010

अमित शाह के बाद क्या सी बी आई, कांग्रेसी राजनीतिक माफिया को पकड़ेगी ?

शेष नारायण सिंह

गुजरात के पूर्व गृह राज्य मंत्री को पकड़ कर सी बी आई ने राजनीतिक भ्रष्टाचार पर हमले की शुरुआत कर दी है .हालांकि इसमें शक़ है कि अगर अमित शाह कांग्रेसी होता तो सी बी आई इतनी सख्ती करती लेकिन जनता के हिसाब से यह एक बड़ा क़दम है . अमित शाह कोई मामूली आदमी नहीं है वह गुजरात के मुख्य मंत्री नरेंद्र मोदी का ख़ास बंदा है .और जानकार बताते हैं कि वह मोदी का बहुत बड़ा वफादार भी है . इसका मतलब यह हुआ कि अमित शाह की गर्दन पर जो शिकंजा कस रहा है वह वास्तव में नरेंद्र मोदी के लिए डिजाइन किया गया है . राजनीति के शिखर पर बैठे लोगों को उनकी आपराधिक गतिविधियों के लिए दण्डित किया जाना लोकतंत्र के बचाव की सबसे बड़ी निशानी है . जबसे नरेंद्र मोदी को उनके किये की सज़ा मिलने की संभावना बढ़ी है , बी जे पी के एक गुट के लोग बहुत परेशान हैं . नरेंद्र मोदी गुट के लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि यह सब कैसे हो गया . लेकिन सच्चाई यह है कि यह सब हो चुका है और अब कम से कम अमित शाह के बचने की संभावना बहुत कम है . और अगर कहीं उन्होंने सरकारी गवाह बनने की पेशकश कर दी तो नरेंद्र मोदी और उनके साथियों के राजनीतिक जीवन की गोधूलि वेला आ जायेगी. अपराध की सज़ा मिलने की पक्की संभावना के मद्दे नज़र, बी जे पी में नरेंद्र मोदी के साथी लोग सी बी आई और सुप्रीम कोर्ट को ही विवाद में घेरने की तैयारी में लग गए हैं . उनका कहना है कि बहुत सारे कांग्रेसी नेताओं के खिलाफ भी सी बी आई की जांच दर्ज है लेकिन गुजरात वाले मामले में जल्दी मचा कर सी बी आई पक्षपात कर रही है . हो सकता है कि यह बात सच भी हो . लेकिन आम आदमी इस से खुश है . उसे मालूम है कि अगर अभी कांग्रेस की सरकार सी बी आई का इस्तेमाल करके अपने राजनीतिक विरोधियों को ठिकाने लगा रही है तो जब विपक्ष की सरकार बन जायेगी तो उस से उम्मीद की जायेगी कि वह कांग्रेस के भ्रष्ट और बेईमान नेताओं को सज़ा देने में सी बी आई का इस्तेमाल करेगी . हाँ यह पक्के तौर पर कहा जा सकता है कि सी बी आई किसी मंत्री के कहने पर केस में तेज़ी तो ला सकती है लेकिन यह उम्मीद करना कि वह कोई गलत काम करेगी , नामुमकिन लगता है . इसलिए यह जनहित में है कि सभी राजनीतिक पार्टियों के अपराधी नेताओं को सज़ा दी जाए . बी जे पी के मोदी गुट के नेता जो हल्ला मचा रहे हैं उस से यह बू आ रही है कि वे कहना चाहते हैं कि कांग्रेस के नेताओं के ऊपर भी बहुत सारे आरोप हैं , इसलिए उनके अपने नेताओं की जांच में थोडा मुरव्वत हो जाए तो ठीक रहेगा . इसके बदले में बी जे पी के कुछ नेता यह कहते नज़र आ रहे हैं कि जब कांग्रेस वाले फंसेगें तो वह भी मुरवात बरत सकते हैं . हालांकि यह जनहित में नहीं है लेकिन संभव है .जैन हवाला काण्ड में यही हुआ था जब लगभग सभी गैर कम्युनिस्ट पार्टियों के नेता एक साथ हो गए थे और बहुत बड़े आर्थिक घोटाले में किसी को भी नहीं फंसने दिया था .
अमित शाह के कुछ और कारनामों से पर्दा उठ रहा है. अब पता चला है कि वह केतन पारेख के शेयर बाज़ार घोटाले का भी सहयात्री रहा है . नामी अखबार हिन्दू में एक खबर छपी है कि अमित शाह ने घूस लेकर उस केतन पारेख की मदद की थी जिसने छोटे शेयर धारकों के १२०० करोड़ रूपये हड़पे थे और माधव पुरा को-ओपरेटिव बैंक को तबाह किया था . इन दोनों ही मामलों में अमित शाह ने मोदी सरकार का इस्तेमाल करके केतन पारिख को बचाया था. यह खुलासा गुजरात सरकार के अपने सी आई डी विभाग ने किया था और सुझाव दिया था कि अमित शाह के खिलाफ मामला इतना बड़ा है कि उसकी जांच सी बी आई से करानी चाहिए . लेकिन नरेंद्र मोदी ने फ़ाइल को दबा दिया था और जिस अधिकारी ने यह भंडाफोड़ किया था , उसे किसी अन्य विभाग में ट्रांसफर कर दिया था. इस तरह साफ़ नज़र आ रहा है कि अमित शाह वास्तव में नरेंद्र मोदी का ख़ास बंदा है और हर वह काम करता था जो गैर कानूनी था, कल पता लगा था कि उसने शोहराबुद्दीन की हत्या इसलिए करवाई थी कि क्योंकि वह हफ्ता वसूली की उसकी ज़मीन पर क़ब्ज़ा कर रहा था . और आज यह नया खुलासा सामने आया है . ज़ाहिर है कि अमित शाह जैसे अभियुक्त को कानून की ताक़त समझा कर सी बी आई बहुत अच्छा काम कर रही है.

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