Monday, July 26, 2010

यह हफ्ता वसूली के मार्केट में वर्चस्व की लड़ाई का एक हिस्सा है

शेष नारायण सिंह

गुजरात के पूर्व गृहमंत्री ,अमित शाह ने हालांकि मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया है लेकिन उनके आका नरेंद्र मोदी ने कहा है कि अमित शाह को जान बूझ कर फंसाया गया है . नरेंद्र मोदी ने यह भी ऐलान किया कि अमित शाह के मामले को राजनीतिक लड़ाई में तब्दील कर दिया जाएगा और उनकी राजनीतिक लड़ाई का नेतृत्व ,नरेंद्र मोदी खुद करेगें. जहां तक कोर्ट की बात है , वहां अमित भाई खुद लड़ेगें. इसके पहले बी जे पी का आलाकमान यह घोषित कर चुका है कि अमित शाह को बचाना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है जब बी जे पी के दफ्तर की पत्रकार वार्ता में संसद के दोनों सदनों में पार्टी के नेता और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता बड़े जोर शोर से अमित शाह का बचाव कर रहे थे तो स्पष्ट हो गया था कि अपने एक अपराधी साथी को बचाने के लिए बी जे पी के मोदी गुट के लोग किस सीमा तक जा सकते हैं ,. लेकिन सी बी आई की चार्ज शीट को देख कर लगता है कि अमित शाह को बचाने की कोशिश करना बी जे पी के लिए राजनीतिक आत्महत्या से कम नहीं है . यहाँ यह भी साफ़ कर देने की ज़रुरत है कि शोहराबुद्दीन की हत्या गुजरात सरकार के मुसलमानों को कमज़ोर करने की रण नीति का भी हिस्सा नहीं है . यह वास्तव में हफ्ता वसूली के मार्केट में वर्चस्व की लड़ाई का एक हिस्सा है . सी बी आई की चार्ज शीट में उदयपुर के पत्थर के व्यापारी हमीद लाला की ह्त्या और उसकी जांच का ज़िक्र किया गया है. हमीद लाला की दिसंबर २००४ में ह्त्या कर दी गयी थी . उसकी हत्या के आरोप में सोहराबुद्दीन , तुलसी राम प्रजापति ,आज़म खां और दो अन्य के ऊपर एफ आई आर दर्ज किया गया था .आरोप था कि सोहराबुद्दीन की अगुवाई में यह गिरोह किसी पत्थर के व्यापरीसे पैसे मांग रहा था , हमीद लाला ने इन लोगों को मना किया तो उसको ही मार डाला . यह सारे लोग इलाके के बदमाश थे और इनके खिलाफ गवाही नहीं मिली लिहाज़ा सबूत की कमी में इन्हें कोर्ट से राहत मिल गयी. सी बी आई की चार्ज शीट में लिखा है कि अमित शाह का भी यही धंधा था और सोहराबुद्दीन को खतम करके उन्होंने हमीद लाला की ह्त्या करने वाले को तो सज़ा दे ही दी , अपना वसूली का साम्राज्य भी बढ़ा लिया .

सी बी आई की चार्जशीट का यह हिस्सा बहुत ही डरावना है . इसकी बारीकी पर गौर करने पर समझ में आ जाएगा कि माफिया स्टाइल में बदमाशी करने के लिए अमित शाह , गुजरात सरकार को इस्तेमाल कर रहा था और अब देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के आलाकमान ने एक ऐसे आदमी को बचाने का काम शुरू कर दिया है जो क़त्ल, अपहरण,और आपराधिक षड्यंत्र के साथ साथ वसूली का भी धंधेबाज़ है . इस तरह के आदमी के बचाव में खड़े होकर बी जे पी ने लोकतंत्र का बहुत नुकसान किया है . बी जे पी की पूरी कोशिश है कि मामला राजनीतिक हो जाए और उसके लिए वह सुप्रीम कोर्ट और सी बी आई जैसी आदरणीय संस्थाओं को भी राजनीतिक उठा पटक का हथियार बनाने में संकोच नहीं कर रही है / लेकिन लगता है कि गृह मंत्री पी चिदंबरम उनकी योजना को सफल नहीं होने देगें . चिदंबरम का बयान बी जे पी के अभियान की खासी हवा निकाल भी देता है . जब अमित शाह के अपराधी साबित होने के बाद बी जे पी ने राजनीतिक अभियान का शंखनाद किया तो गृह मंत्री से बहुत ही साफ़ शब्दों में कह दिया कि जिस जांच के बाद अमित शाह के ऊपर चार्ज शीट दाखिल हुई है वह केंद्र सरकार के आदेश पर नहीं हुआ है .उन्होंने याद दिलाया कि सोहराबुद्दीन की हत्या के मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सी बी आई ने की है . उन्होंने कहा कि बी जे पी के बड़े नेता और सुप्रीम कोर्ट के बहुत बड़े वकील अरुण जेटली को चाहिए था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ध्यान पूर्वक पढ़ लेते तो उन्हें कांग्रेस पर आरोप लगाने की ज़रुरत न पड़ती. वास्तव में सुप्रीम कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप तब किया था जब सोहराबुद्दीन के केस में उसके परिवार वालों ने गुजरात पुलिस की जांच को फर्जी बताया था . और अब जो कुछ सामने आया है उस से देश की न्याय व्यवस्था पर ही संकट के बदल मंडराने लगे हैं . यहाँ यह साफ़ कर देना ज़रूरी है सोहराबुद्दीन को इस लिए नहीं मारा गया कि वह मुसलमान था , बल्कि उसकी ह्त्या के पीछे हफ्ता वसूली की मार्केट में उसका बढ़ रहा दबदबा था जिस से अमित शाह के गिरोह का नुकसान हो रहा था . सी बी आई की चार्जशीट में यह बात उभर कर सामने आई है . इसलिए इसे इशरत जहां या अन्य फर्जी मुठभेड़ों से मिला कर देखना ठीक नहीं है यह वसूली माफिया की वर्चस्व की लड़ाई है जिसमें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त अमित शाह भारी पड़ रहा था और उसने गुजरात पुलिस का इस्तेमाल करके विरोधी का सफाया कर दिया . अगर बी जे पी ऐसे अपराधी के लिए अपनी राजनीतिक साख दांव पर लगाती है तो वह राजनीतिक हराकीरी से कम नहीं होगा

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