शेष नारायण सिंह
मुंबई,१ जनवरी.कांग्रेस के इस नए हाथ से महाराष्ट्र में दलित राजनीति करने वालों को भारी झटका लगा है .दादर में चैत्यभूमि के पास इण्डिया यूनाईटेड मिल्स का साढ़े बारह एकड़ का प्लाट है .इसे इंदु मिल भी कहते हैं . इस मिल की साढ़े बारह एकड़ ज़मीन को केंद्र सरकार ने दे भीमराव अंबेडकर का स्मारक बनाने के लिए दे दिया है . और इसका सारा श्रेय यहाँ कांग्रेस पार्टी और मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण की सरकार को मिल रहा है . मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष कृपाशंकर सिंह का दावा है कि यह फैसला कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ,प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के सौजन्य से हो सका है.
इंदु मिल की ज़मीन के लिए बहुत वक़्त से जोड़ तोड़ चल रही थी. इसके नाम पर राजनीति भी हो रही थी. शुरू में केंद्र सरकार ने साढ़े चार एकड़ ज़मीन ही छोड़ने की बात की थी . महाराष्ट्र की सारी राजनीतिक पार्टियां इसी बहाने कांग्रेस को अंबेडकर विरोधी साबित करने के चक्कर में थीं . डॉ भीम राव अंबेडकर को महारष्ट्र में बहुत सम्मान मिलता है और वह सम्मान चुनावी नतीजों को प्रभावित करता है . अभी इसी साल छः दिसंबर को बाबा साहेब अंबेडकर के निर्वाण दिवस के दिन कुछ नेता मिल में घुस गए थे और क़ब्ज़ा कर लिया था. बाद में हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई थी और कहा था कि ज़मीन जल्दी खाली कराया जाए. लेकिन ज़मीन खाली कराने पर कांग्रेस को भारी राजनीतिक नुकसान हो सकता था . इसी दुविधा से बचने के लिए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण ने राज्य के कांग्रेसियों का एक प्रतिनधिमंडल लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से मुलाक़ात की. उनके साथ महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष मानिक राव ठाकरे, मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष कृपा शंकर सिंह , सांसद एकनाथ गायकवाड , मंत्री नसीम खां और वर्षा गायकवाड भी थे. सोनिया गाँधी ने राजनीति को समझा और मनमोहन सिंह से बात की . उसके बाद इंदु मिल की साढ़े बारह एकड़ ज़मीन डॉ भीम राव अम्बेडकर के स्मारक के लिए दे देने का राजनीतिक फैसला हो गया . ज़ाहिर है इस एक फैसले से कांग्रेस ने कई चुनावों में अपने आप को मज़बूत करने में सफलता पायी है .
इंदु मिल बंद है. मिल के मालिकों ने इसे जीरो पर पंहुचा कर छोड़ दिया था . बाद में सरकार ने इस मिल को ले लिया था. और मिल के सारे कर्जे और देनदारी सरकार का ज़िम्मा हो गया था . मुंबई में ज़्यादातर मिलों का यही हाल हुआ था . लेकिन जब मुंबई में ज़मीन की कीमत खूब बढ़ी तो सरकार को घाटा कम करने में मदद मिली. इण्डिया यूनाईटेड मिल्स यानी इंदु मिल भी इसी खेल का हिस्सा है .आम तौर पर माना जा रहा था कि इतनी कीमती ज़मीन को सरकार छोड़ेगी नहीं और कांग्रेस को घेरने के लिए राजनीतिक पार्टियां इस मिल की ज़मीन और दलित राजनीति को जोड़कर कांग्रेस को मुसीबत में डालती रहती थीं .अरबों की इस ज़मीन को अब केंद्र सरकार ने डॉ भीम राव अंबेडकर का स्मारक बनाने के लिए दे दिया है. ज़ाहिर है महाराष्ट्र में और पूरे देश में डॉ अंबेडकर के नाम पर राजनीति करने वालों को कांग्रेसी इस एक फैसले से घेरने की कोशिश करेगें.
इंदु मिल की ज़मीन के राजनीतिक महत्व को देखते हुए महराष्ट्र विधान सभा के नागपुर में हुए अधिवेशन में एक प्रस्ताव भी पास किया गया था कि यह ज़मीन डॉ अंबेडकर के स्मारक के लिए दे दी जाए. और अब कांग्रेस ने इस मुहिम में सफलता हासिल करके कई चुनावों में अपनी ताक़त को बढ़ा लिया है . इसी साल फरवरी में महराष्ट्र में जिला परिषद् के चुनाव होंगें ,जहां केंद्र सरकार के इस फैसले के कारण कांग्रेस की सीटों में वृद्धि होगी . मुंबई के महानगर पालिका चुनावों में निश्चित रूप से कांग्रेस को अंबेडकर वादियों को कमज़ोर करने में मदद मिलेगी. राजनीतिक जानकार तो यहाँ तक बताते हैं कि इस फैसले का फायदा कांग्रेस पार्टी को उत्तर प्रदेश में भी होगा जहां कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी दिन रात मुख्य मंत्री मायावती के खिलाफ राजनीतिक अभियान चला रहे हैं और यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि मायावती न तो डॉ अंबेडकरवादी हैं और न ही दलितों की सही शुभचिन्तक हैं . वे तो अपने आर्थिक लाभ के लिए अंबेडकर के सबसे मह्त्वपूर्ण सिद्धांतों को भुला चुकी हैं.डॉ अंबेडकर जाति संस्था का विनाश चाहते थे जबकि मायावती जाति के नाम पर ही वोट मांग रही हैं और जाति का विनाश करने के बारे में कुछ भी नहीं सोच रही हैं .
माय नेम इज़ ख़ान एंड आई एम ए...खुशदीप
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जो पहले कभी छोटे नवाब थे...अब बड़े नवाब हैं...अब नवाब साहब से कोई आवाज़
नीची करने के लिए कहने की गुस्ताख़ी कैसे कर सकता है...वो भी जब नवाब साहब के
साथ ...
1 day ago

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